ताइक्वांडो खिलाड़ी आंचल कुमारी।

बेटियों के साथ होने वाले भेदभाव को रोहतास की आंचल कुमारी ने दिखाया आईना

1्र0वीं कक्षा की इस छात्रा ने ताइक्वांडो गेम में जीते हैं कई गोल्ड मेडल

बजरंगी कुमार सुमन की रिपार्ट

सासाराम। घर में बेटी के पैदा होते ही बेटियों को जन्म देने वाली मां प्रताड़ित होने लगती है। हालांकि सामाजिक ठेकेदार ऐसी घटनाओं में गरीबी और अशिक्षा का हवाला देकर यह कहते हैं कि शिक्षित और संपन्न घरानों में ऐसी घटना नहीं होती है लेकिन लिंग की जांच करा कर भ्रूण हत्या को रोकने के लिए किए जा रहे सरकारी प्रयास इस बात के गवाह हैं कि समाज के हर तबके में बेटियां आज भी उपेक्षित हैं। लोग अब भी आंख होते हुए भी अंधे होने का नाटक करते हैं लेकिन रोहतास जिले की आंचल कुमारी ने बेटियों के अनमोल होने का एहसास करा दिया है। पढ़ाई के साथ अपनी दिनचर्या का महज 2 घंटा प्रतिदिन निकाल कर आंचल ने घर में सोने की बरसात करने की शुरुआत कर दी है।

दो वर्षों की मेहनत और होने लगी सोने की बरसात
आंचल कुमारी ने ताइक्वांडो खेल में सोने की बरसात कर डाली है। सदर प्रखंड सासाराम के दरिगांव निवासी सेवानिवृत्त पुस्तकालय अध्यक्ष कामता सिंह के पुत्र योगेंद्र नारायण सिंह की दूसरी पुत्री आंचल ने 16 वर्ष की उम्र में सोने की बरसात की है। यहां बताते चलें कि गेम खेलने की शुरुआत 19 अप्रैल 2019 से करते हुए आंचल कुमारी ने बहुत कम समय में जिला स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में रोहतास के अन्य प्रतिभागियों को हराते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया था। मुंगेर में पिछले वर्ष आयोजित राज्य स्तरीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में प्रथम बार में ही हिस्सा लेते हुए गोल्ड पर कब्जा जमाया था। लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन अंडर 16 राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भी गोल्ड मेडल प्राप्त करते हुए आंचल ने अपने परिजनों को गौरवान्वित किया है।

आंचल बताती हैं कि यह सफलता उनके दादा कामता सिंह के प्रोत्साहन का परिणाम है। आंचल बताती है कि उनकी मां रूबी कुमारी सामान्य महिला के तौर पर ब्याह कर इस घर में आई थी लेकिन दादा के प्रोत्साहन का परिणाम हुआ कि माता रूबी कुमारी ने प्राथमिक शिक्षक के तौर पर सासाराम में नौकरी प्राप्त की। माता के शिक्षक होने के कारण घर की जिम्मेवारी भी बेटियों को संभालनी पड़ती है। घरेलू कार्य करने के बावजूद समय निकालकर ताइक्वांडो की प्रैक्टिस करते हुए आंचल ने विगत 2 वर्षों में सोने की बरसात कर डाली है। ऐसे में यह कहना उचित होगा कि बेटियों काे ना खोना बेटियां बरसाती है सोना। आंचल फिलहाल सासाराम शहर के ईश्वर चंद्र विद्यासागर विद्यालय में दसवीं कक्षा की छात्रा है। जिन्हें अगले वर्ष मैट्रिक की परीक्षा देनी है।

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