नेपाल की राजनीति में बढ़ता ही जा रहा हस्तक्षेप, नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी को एकीकृत करने की हो रही कोशिश

चीन कम्युनिस्ट पार्टी के अन्तर्राष्ट्रीय समन्वय विभाग के उपमन्त्री गुओ येझाउ के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम नेपाल में

राजेश कुमार शर्मा
जोगबनी (Goodmorning news desk)। नेपाल में हाल के वर्षों में चीन की ओर से किये गए हजारों करोड़ का निवेश डूबने की आशंका व भारत की ओर से सुरक्षा की चिंता को लेकर चीन की बेचैनी बढ़ती ही जा रही है।

नेपाल में संसद भंग होने व चुनाव की नई तारीखों के ऐलान के बावजूद चीन को अब भी लग रहा है कि वह नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी को एकजुट करने में कामयाब हो जाएगा। इसके लिए नेपाल की राजनीति में सीधा हस्तक्षेप करने से चीन बाज नहीं आ रहा। इस मिशन में चीन की राजदूत को कामयाबी नहीं मिली तो चीन ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के विदेश विभाग के उपमन्त्री गुओ येझाउ नेपाल में आ धमके।


नेपाल में राजनीतिक गतिरोध को समाप्त करने के उद्देश्य से गुओ येझाउ रविवार की दोपहर चिनिया एयरलाइंस के विमान से चार दिन के नेपाल भ्रमण पर आये है। इन्होंने तत्कालीन एमाले व माओवादी केन्द्र के बीच एकीकरण होने से पूर्व नेपाल आ कर खुशी व्यक्त की थी। अब चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता नेकपा के एकता भंग होने के बाद परिस्थिति को आकलन करने आये है।


चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अन्तर्राष्ट्रीय समन्वय विभाग के उपमन्त्री गुओ येझाउ के नेतृत्व में चार सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल की टीम चार दिन के नेपाल भ्रमण में आने की बात नेपाल विदेश मंत्रालय ने कही है। प्रतिनिधिमण्डल के द्वारा चार दिन के नेपाल भ्रमण में राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी, प्रधानमन्त्री एवं नेकपा अध्यक्ष केपी शर्मा ओली तथा दूसरे पक्ष के नेकपा व नेपाली कांग्रेस के शीर्ष नेता से मुलाकात का कार्यक्रम है।


राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी द्वारा संसद भंग करने के बाद नेपाल की राजनीति में हस्तक्षेप करने वाले पहला विदेशी अधिकारी चीन की ओर से भेजा गया है। वहीं एक महीने के बीच में नेपाल आने वाले दूसरे चीनी अधिकारी हैं । इससे पूर्व चीन के रक्षामन्त्री जनरल वेई फेंगे भी नेपाल भ्रमण कर वापस जा चुके है।


नेकपा में फूट के बाद परिस्थिति के आकलन को भेजा है चीन ने
नेकपा में विवाद के बाद दो समीकरण बनने के बाद उत्पन्न राजनीतिक परिस्थिति को आकलन करने राजनीतिक दल कब शीर्ष नेता के साथ मुलाकात करने के लिए चीन का बिशेष दूत होने की बात राजनीतिक गलियारे में गूंज रही है।


राजनीतिक गतिरोध में सक्रिय है चीनी राजदूत
इससे पूर्व नेपाल में चीन की राजदूत होउ यान्छी नेपाल के राजनीतिक गतिरोध का अंत करने के लिए शुक्रवार से ही सक्रिय है। बुधवार को राष्ट्रपति विधा देवी भण्डारी, गुरुवार को अध्यक्ष प्रचण्ड व नेता वर्षमान पुन के साथ मुलाकात की थी। इतना ही नहीं यांछी ने शुक्रवार को अध्यक्ष माधव नेपाल, नेता कृष्णबहादुर महरा से भी मुलाकात कर राजनीतिक समीकरण मिलाने का भरपूर प्रयास किया था।


राजनीतिक विश्लेषक ने कहा-चीन का हस्तक्षेप नेपाल के लिए अच्छे संकेत नहीं
चीनी कूटनीतिक स्रोत के अनुसार संसद भंग के कारण नेपाल में उत्पन्न परिस्थिति का नजदीक से अध्ययन के लिए चीनी नेता का नेपाल आगमन हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषक गंगा प्रसाद यादव की मानें तो नेता के साथ पूर्व में मुलाकात में चीनी राजदूत यान्छी ने संसद भंग होने पर आश्चर्य व्यक्त किया था। चीनी राजदूत का मानना था कि प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली के द्वारा राजनीतिक कार्ड के रूप में संसद भंग करने का प्रयास करने तक का आकलन यांछी ने किया था लेकिन शायद संसद भंग होने के अनुमान से चूक गई थी ।


एमाले व माओवादी की चुनावी जीत पर आये थे चीनी विदेश प्रमुख
एमाले माओवादी केन्द्र के चुनावी गठबन्धन के बहुमत में आने व केपी ओली के प्रधानमन्त्री होने के साथ ही चीनी विदेश प्रमुख गुओ ने नेपाल भ्रमण किया था। गुओ के भ्रमण के तीन महीने के बाद एमाले व माओवादी के बीच एकीकरण हुआ था। तब गुओ ने प्रधानमन्त्री ओली, तत्कालीन माओवादी केन्द्र के अध्यक्ष प्रचण्ड, कांग्रेस सभापति शेरबहादुर देउवा के साथ मुलाकात की थी। स्थानीय, प्रान्तीय तथा संसदीय निर्वाचन सफलतापूर्वक सम्पन्न होने पर ओली, प्रचण्ड व कांग्रेस नेता देउवा को बधाई दी थी। वही गुओ ने सफल चुनावी गठबन्धन के प्रति ओली व प्रचण्ड को बधाई दी थी। उन्होंने चीन के राष्ट्रपति सी जिनपिंग के सन्देश को देउवा को भी सुनाते हुए चीन भ्रमण के निमंत्रण दिया था।


एक बड़ा निवेश नेपाल में चीन का
भारत से गतिरोध के बीच चीन किसी भी सूरत में नेपाल में अपनी पकड़ को कमजोर नही करना चाहता है हाल के दिनों हजारो करोड़ों रुपये का निवेश चीन नेपाल में कर रहा है ताजा उदाहरण में चीनी निवेश में पोखरा में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण शामिल है, जो निर्माण के ट्रैक पर है व चीन काठमांडू सम्पर्क पथ का विस्तार का दूसरा चरण भी आगे बढ़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार चीन की अपनी सुरक्षा चिंताएं हैं और नेपाल के रास्ते भारत को घेरने की इसलिये वह नेपाल में राजनीतिक स्थिरता और नेपाल में एक स्थिर सरकार देखना चाहता है।

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