चीनी एप्प बन्द होने की खुशी, मगर जिन लाखों लोगों की नौकरी गई हैं उनके घर का चूल्हा कैसे जलेगा?

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sdgnsd - चीनी एप्प बन्द होने की खुशी, मगर जिन लाखों लोगों की नौकरी गई हैं उनके घर का चूल्हा कैसे जलेगा?

PATNA : आप चीनी एप्प बन्द होने से खुश हो रहे हैं, नौकरी जाएगी उनका क्या? पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले कई साथी uc news और टिक टॉक में काम कर रहे हैं. उनका क्या होगा. जो न्यूज़ चैनल छरप-छरपकर इस खबर की जानकारी दे रहे हैं, वो खुद अपने यहां कई लोगों को निकाल चुके हैं…

भल्लाल देव का रथ याद है? इस सरकार के लगभग सभी बड़े फैसले बिलकुल भल्लाल देव के रथ की तरह चलते हैं. उद्देश्य दुश्मन को मा’रने का होता है लेकिन अपने ही लोगों का नरसं’हार करते हुए, मासूमों की ला’श बिछाते हुए आगे बढ़ते हैं.

भ्रष्टाचार नाम के दु’श्मन को मा’रने के लिए नोटबंदी की तो सैकड़ों लोग बैंक की क़तारों में मारे गए, लाखों की नौकरियाँ चली गई और न जाने कितने लघु उद्योग ऐसे डूबे कि फिर कभी नहीं उभर सके. जबकि भ्रष्टाचार/कालाधन जस का तस बना रहा. पैसा भी लगभग पूरा ही बैंकों में वापस आकर काले से सफ़ेद हो गया. मतलब खाया-पिया कुछ नहीं, ग्लास तोड़ा बारह आना.

अब ऐसा ही 59 चीनी एप प्रतिबंधित करने के मामले में भी होता दिख रहा है. हालाँकि इसमें कोई दो राय नहीं कि यह एक अहम फ़ैसला है. चीन के डॉमिनेटिंग रवैए और लगातार उ’ग्र होते व्यवहार को यह झटका देना जरूरी था. हो सकता है इस फैसले में कई तकनीकी चुनौतियाँ भी हों लेकिन इसका प्रतीकात्मक महत्व बड़ा है. ये चीन को एक सीधा-सीधा संदेश तो है ही कि उसकी दादागिरी यूँ ही नहीं चलती रहेगी.

लेकिन बात इससे आगे की भी है. ये जो 59 एप प्रतिबंधित की गई हैं इनमें हजारों भारतीय नौकरी करते हैं और लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी इनसे चलती है. ये जो तमाम लोग एक झटके में बेरोज़गार होंगे, इनके लिए सरकार के पास अगर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है तो ये कदम भी भल्लाल देव के रथ की तरह ही आगे बढ़ने वाला है जो दुश्मन को नुक़सान पहुँचाने से पहले अपनों की ही जा’न ले लेगा.

बाक़ी नक़ली देशभक्ति का चूरण चाटकर सां’प्रदायिक ज़हर फ़ैलाने वालों ने तो गंद फैलाना शुरू कर ही दिया है. ये लोग इसमें भी धर्म घुसेड़ कर मज़ाक़ बना रहे हैं कि ‘टिक टॉक वाली साज़िया का अब क्या होगा?’ ख़ैर इनसे उम्मीद भी क्या, जब इनके आराध्य ही नोटबंदी के समय पूरी निर्लज्जता से कह सकते हैं कि ‘घर में बेटी की शादी है और पैसा नहीं है हें हें हें…’ सोचिए जिसके घर में सच में उस वक्त बेटी की शादी थी उस पर ये हंसी कैसे वज्र की तरह गिरी होगी.

ऐसा ही अब उनके साथ न हो, जो इन 59 एप कंपनियों से जुड़े थे. चीन के ख़िलाफ़ देश को मज़बूत करने के लिए तमाम देशवासी एकजुट-एकमुट हैं. लिहाज़ा इस फैसले का भी स्वागत है. लेकिन हम सब अगर सच में चीन के ख़िलाफ़ एकजुट हैं तो हमें ये सुनिश्चित करना चाहिए कि इस फैसले की क़ीमत चुनिंदा भारतीयों को ही न चुकानी पड़े. सरकार ने एक हाथ से अगर दुश्मन पर प्रहार किया है तो दूसरे हाथ से प्रजा की रक्षा करना भी उसका ही राजधर्म है.

‘एक राजा का धर्म सिर्फ़ शत्रु को मा’रना ही नहीं होता, प्रजा को बचाना भी होता है.’ यही कहा था न शिवगामी ने बाहुबली को भल्लाल देव से श्रेष्ठ बताते हुए? तो जो लोग इन्हें ही बाहुबली मानते भी हैं, ऐसे लोगों को तो विशेष तौर से इस पहलू पर सोचना चाहिए.

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