पटना. शराबबंदी पर विपक्ष के हमले ने सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आनन- फानन में सीएम नीतीश कुमार सोमवार को मद्य निषेद्य विभाग के अधिकारियों के साथ रिव्यू मीटिंग की।

मीटिंग में उन्होंने शराब पीकर घूमने वालों और इसकी खरीद बिक्री करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। शनिवार को विधान सभा के अंदर और बाहर विपक्ष के हंगामे के बाद सरकार रेस हो गई है और कार्रवाई के मूड में है। विपक्ष ने इस मामले में सरकार पर दोहरी नीति अपनाने के आरोप लगाए हैं। साथ ही सदन के अंदर और बाहर इस मामले पर सरकार से कई सवाल किए। साक्ष्य और आवश्यक कागजात पेश कर सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया।

क्या है मामला
दरअसल, चार माह पहले सरकार में भाजपा कोटे के मंत्री रामसूरत राय के पिता के नाम की जमीन पर चल रहे स्कूल परिसर से भारी मात्रा में शराब मिला था। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर पिछले सप्ताह मंगलवार को उत्पाद विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान सीपीआईएमएल के अमरजीत कुशवाहा ने सदन में सवाल किए। उनके इस सवाल को कई अखबारों ने छापा और इसके तुरंत बाद इसपर चर्चा होने लगी.

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसमें सक्रियता दिखाते हुए शनिवार की सुबह उस विद्यालय को चलाने वाले अमरेंद्र कुमार के छोटे भाई अंशुल भास्कर को मीडिया के सामने पेश कर दिया। उसने मीडिया के सामने दावा किया कि छापेमारी उनके भाई की सूचना के आधार पर की गई थी. लेकिन, पुलिस ने उन्हें पुरस्कार देने के बदले जेल भेज दिया. पुलिस की इस कार्रवाई ने नीतीश कुमार के उस दावे को खोखला साबित कर दिया जिसमें उन्होंने सार्वजनिक रूप से शराब के कारोबार के बारे में लोगों से पुलिस को सूचना देने का आग्रह किया था। इसके साथ ही उन्होंने जनता को यह भी भरोसा दिलाया था कि सूचना देने वाले शख्स की पहचान गुप्त रखी जाएगी.

तेजस्वी यादव इसको ही आधार बनाकर सदन के अंदर और बाहर जमकर हंगामा किया. इधर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मामले पर मीडिया से बात करने से बचते रहे। क्योंकि यह मामला एक मंत्री से जुड़ा था और वो भी भाजपा कोटे के मंत्री थे. इसलिए वो चाहते थे कि सफाई उनकी तरफ से आये. लेकिन शायद नीतीश कुमार को इस बात का अंदाजा नहीं होगा कि सफाई से सवाल उनके दावे और सुशासन पर उल्टे खड़े हो जायेंगे.

मंत्री के बयान से कठघरे में सरकार
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और विपक्ष के हंगामा पर आनन फानन में सरकार के मंत्री रामसूरत राय ने भाजपा कार्यालय में पत्रकारों के सामने अपनी सफाई दी। मंत्री ने पत्रकारों के सामने माना कि नवंबर में जहां से शराब बरामद हुआ था वह जमीन उनके भाई का है और विद्यालय उनके पिता के नाम पर है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वो विद्यालय उनके भाई ने लीज पर दिया है. लेकिन साथ-साथ उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्राथमिकी में उनके भाई का नाम भी है.

इससे साफ हो गया कि एफआईआर होने के बाद ना तो स्थानीय पुलिस ने उनके भाई को गिरफ्तार करने की हिम्मत जुटायी और जैसा नीतीश कुमार दावा करते हैं कि जिस भी कैंपस से शराब पकड़ा जाएगा वहां पर पुलिस थाना या सरकारी कार्यालय खोले जायेंगे वैसा कुछ हुआ. मंत्री रामसूरत राय के इस बयान ने शराबबंदी पर सरकार के दोहरे चरित्र को उजागर कर दिया। मंत्री के बयान ने विपक्ष को मौका दे दिया और सरकार कठघरे में खड़ी हो गई। सरकार के मंत्री और विधायक फिलहाल इसपर कुछ बोलने से परहेज कर रहे हैं.

मद्य निषेद्य मंत्री व अन्य के साथ की रिव्यू मीटिंग
मामला के तुल पकड़ने के बाद सोमवार को सीएम नीतीश कुमार मद्य निषेद्य विभाग के मंत्री सुनील कुमार, डीजीपी और सीनियर पुलिस अधिकारियों के साथ अपने अणे मार्ग स्थित आवास पर एक रिव्यू मीटिंग की। उन्होंने कहा कि शराब पीने वालों के साथ-साथ शराब के धंधेबाजों पर भी पूरी तरह से नकेल कसें। शराब के कारोबार में संलिप्त व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई हो. शराब माफिया जो इस कार्रवाई के बाद जेल जाते हैं, उनके जेल से बाहर आने पर नजर बनाए रखें। इसके साथ ही लोगों को शराब के सेवन से होने वाली क्षति के बारे में सोशल मीडिया एवं अन्य प्रचार तंत्रों के माध्यम से सचेत और जागरुक करें।

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