पटना. केंद्र सरकार ने अप्रवासी मजदूरों (Immigrant laborers), छात्र को वापस अपने गृह राज्य लाने के लिए भले ही गाइडलाइन जारी कर दिया हो, लेकिन बिहारी मजदूरों को वापस अपने घर आना आसान नहीं होगा. बिहार सरकार उनको अपने प्रदेश लाने पर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Bihar Deputy Chief Minister Sushil Kumar Modi) ने साफ कहा है कि हमारे पास इतने बस नहीं कि सबको बुलाया जा सके. सरकार के पास फिलहाल इस बात का कोई जवाब नहीं है कि बिहार के बाहर फंसे हुए मजदूरों को कैसे बिहार लाया जाए। राहत देने वाली बात बस इतनी सी है कि डिप्टी सीएम ने इतना जरूर कहा कि मुख्य सचिव के साथ बैठक कर सारी बातों पर चर्चा करेंगे और कोई रणनीति बनायी जाएगी.

विपक्ष ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
बिहारी मजदूरों को वापस लाने के सवाल पर डिप्टी सीएम के हाथ खड़े कर देने पर विपक्ष ने सवाल
खड़ा किया है. कांग्रेस नेता प्रेमचन्द्र मिश्रा ने कहा कि सरकार अब भाग नहीं सकती. बिहार सरकार
पहले गाइडलाइन बनाने की बात कह रही थी अब गाइडलाइन बन जाने के बाद संसाधन के रोना रो
रही है. प्रेमचन्द्र मिश्रा ने हमला करते हुए कहा कि संसाधन नही है तो दूसरे राज्यों से मांग करें, पर
छात्रों और मजदूरों को वापस लाएं.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जारी की नई गाइडलाइन
बुधवार को केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के दौरान ऐसे लोगों को अपने गांव-घर जाने की अनुमति दे दी है.
गृह मंत्रालय ने बुधवार को राज्यों को इस संबंध में आदेश जारी किया. इसमें कहा गया है कि फंसे
मजदूरों, छात्रों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों आदि को बसों से उनके गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा. बसों को अच्छी
तरह सैनिटाइज किया जाएगा और लोगों को बैठाने में फिजिकल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखना होगा.
आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है.

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