WhatsApp Image 2019 07 24 at 23.09.33 - बिहार में छिन्न-भिन्न महागठबंधन क्या पुनर्जीवित हो पायेगा? जानिये कैसे होगा विपक्ष एकजुट                                   अरुण कुमार पाण्डेय

पटना. लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद छिन्न-भिन्न विपक्ष को पुनर्जीवित करने के लिए मंगलवार को पांच दलों के नेता बैठक में साथ हुए। महागठबंधन से अलग होकर अकेले अपने बूते विधानसभा चुनाव लड़ने का एलान कर चुके पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी महागठबंधन की बैठक में शामिल हुए। पूर्व मुख्यमंत्री, राजद की उपाध्यक्ष एवं विधान परिषद में विपक्ष की नेता राबड़ी देवी के आवास पर बैठक हुई।

विधानसभा का अगले वर्ष होने वाले चुनाव में सत्तारूढ़ जदयू-भाजपा गठबंधन के मुकाबले विपक्षी महागठबंधन को अस्तित्व बचाने के साथ अभी कई मुकाबले देने हैं। विधानसभा चुनाव में क्या महागठबंधन तेजस्वी प्रसाद यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगा, यह लाख टके का सवाल बना है। लंबे समय से मुख्यमंत्री बनने का सपना पाल कर राजनीतिक अभियान के साथ स्वजातीय मतदाताओं को गोलबंद करने का भगीरथ प्रयास कर रहे उपेन्द्र कुशवाहा तेजस्वी का नेतृत्व स्वीकार करेंगे? क्या कांग्रेस फ्रंटफुट पर खेलेगी? इन सवालों से निपटने पर ही महागठबंधन का अस्तित्व बचेगा और भविष्य बनने की उम्मीद जगेगी।

 

अभी तेजस्वी की दल में परीक्षा

लोकसभा चुनाव में शून्य पर आउट होने के बाद तेजस्वी की राजनीतिक चालढाल से विपक्ष को नुकसान की भरपाई के साथ राजद में ही परीक्षा देनी है। लालू प्रसाद की राजनीतिक विरासत जितनी आसानी से मिली है, उसे बचाना, बरकरार रखना और बढाना फिलहाल अत्यंत कठिन दिआ रहा है।चुनाव तक विधायकों को एकजुट रखना ही तेजस्वी के लिए असली परीक्षा है। राजद के संगठनात्मक चुनाव में लालू के फिर अध्यक्ष बनने और राबड़ी देवी के उपाध्यक्ष या कार्यकारी अध्यक्ष बनने में ने परेशानी है और न चुनौती। परंतु तेजस्वी के सर्वेसर्वा बनने की सोचना भी पार्टी के लिए खतरे की घंटी है। पार्टी की ओर से तेजस्वी के ही नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ने का निर्णय हो चुका है।

विधानसभा चुनाव से पहले कई चुनाव

लोकसभा चुनाव में विपक्ष का जैसा प्रदर्शन रहा, उससे निकट के चुनावों में बहुत अच्छे की उम्मीद नहीं की जा सकती। लोकसभा चुनाव में 40 सीटों में सिर्फ किशनगंज में कांग्रेस ने जीत दर्ज कर विपक्ष की उपस्थिति और एक सीट बचा पाई। भाजपा 18, जदयू17 और लोजपा 5 सीटों पर जीत दर्ज करने के साथ विपक्ष को धूल चटा दी। भाजपा को 97,जदयू को 92,लोजपा को 35, राजद को 9,कांग्रेस को 5 , एआईएमआईएम को 2 और रालोसपा, हम, भाकपा और माले को एक-एक विधानसभा सीट पर बढत मिली है। नवम्बर में लोकसभा की एक और विधानसभा की पांच सीटों के उपचुनाव होने हैं।

उसके बाद अगले वर्ष विधान परिषद और राज्य सभा की कई सीटों के चुनाव हैं। इन चुनावों में विपक्षी एकजुटता की पहली परीक्षा होगी। महागठबंधन की बैठक में नेताओँ की उपस्थिति से विशेष रूप से राजद और तेजस्वी के लिए अनुकूल रहा। राजद की ओर से जगदानंद सिंह और आलोक मेहता खास रहे बैठक के बाद महागठबंधन की ओर से तेजस्वी प्रसाद यादव, जीतने राम मांझी मदन मोहन झा, विरेन्द्र राठौर, उपेन्द्र कुशवाहा, मुकेश सहनी और रामचंद्र पूर्वे ने संयुक्त बयान जारी किया।

निशाने पर राजग

राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, रालोसपा, हम, वीआईपी पार्टी का महागठबंधन महज चुनाव के लिए नहीं था। यह गठबंधन आवाम के सरोकारों को उसकी समेकित पूर्ति के लिए था और हम अपनी सामूहिक जिम्मेवारी को भली भांति समझते हैं। हम सब का यह मानना है की गरीब गुरबा, पिछड़ा, दलित, वंचित समाज और युवाओं के सरोकारों से मौजूदा केंद्र और राज्य की सरकार को रत्ती भर भी परवाह नहीं है।

WhatsApp Image 2019 08 27 at 23.15.15 1 - बिहार में छिन्न-भिन्न महागठबंधन क्या पुनर्जीवित हो पायेगा? जानिये कैसे होगा विपक्ष एकजुट

आरक्षण बना मुद्दा

महागठबंधन की ओर से कहा गया कि हम तमाम दलों के लिए हमारी राजनीति सिर्फ चुनाव लड़ने और सीटों के बंटवारे का नाम नहीं है। हमारी समकालीन राजनीति का ताल्लुक सर्वप्रथम इस बात से है कि किस प्रकार इस मौजूदा संकट की घड़ी से राज्य और देश को निकाला जाए। अर्थव्यवस्था आज़ादी के बाद के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। बेरोजगारी हर घर में दस्तक दे चुकी है, असंगठित क्षेत्र और किसानी लहूलुहान है। सदियों से स्थापित गुरु रविदास के मंदिर को तोड़ा जा रहा है।

ग़रीबों की रोज़ी-रोटी और आशियाने को उजाड़ा जा रहा है। आरएसएस एवं बीजेपी सरकार संविधान और आरक्षण को समाप्त करने की साज़िश रच रही है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मंशा भी ज़ाहिर की है। हम सभी यह भी जानते हैं सामाजिक सौहार्द किस बदहाली से गुजर रहा है। बिहार में एनडीए गठबंधन 12 वर्ष से अधिक समय से शासन कर रहा है फिर भी बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार, पलायन, व्यापार और क़ानून व्यवस्था का बुरा हाल है।

जनसंघर्ष की राह

महागठबंधन के तमाम सहयोगी दल इस बात से भलीभांति परिचित हैं कि मौजूदा दौर में राजनीति के स्वरूप और चरित्र को बदलना भी हमारी जिम्मेदारी है। राज्य और राष्ट्र को एक वैकल्पिक लोकन्मुख राजनीति का का तेवर दिया जाए ये हम सबों का भरोसा है। हमारा गठबंधन सिर्फ नेताओं के बीच का गठबंधन नहीं बल्कि समाज के हाशिये पर पड़े लोगों का हाथ पकड़ कर चलने की प्रतिबद्धता का दूसरा नाम है। आज की इस बैठक में हमने यह निर्णय लिया है आने वाले दिनों में हम जनसंघर्षों के माध्यम से जन सरोकार के मुद्दों पर राज्य भर में लोगों को शिक्षित और जागरूक करने के साथ शांतिपूर्ण संघर्ष में उनके सहभागी होंगे।

क्या कहा बैठक के बाद

राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, रालोसपा, हम, वीआईपी पार्टी का महागठबंधन महज चुनाव के लिए नहीं था। यह गठबंधन आवाम के सरोकारों को उसकी समेकित पूर्ति के लिए था और हम अपनी सामूहिक जिम्मेवारी को भली भांति समझते हैं। हम सब का यह मानना है की गरीब गुरबा, पिछड़ा, दलित, वंचित समाज और युवाओं के सरोकारों से मौजूदा केंद्र और राज्य की सरकार को रत्ती भर भी परवाह नहीं है।

 

 

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