हाईकोर्ट प्रशासन से ही निचली अदालतों के भ्रष्ट न्यायिक अधिकारियों को संरक्षण मिलता हैः- जस्टिस राकेश

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PHC 905x613 - हाईकोर्ट प्रशासन से ही निचली अदालतों के भ्रष्ट न्यायिक अधिकारियों को संरक्षण मिलता हैः- जस्टिस राकेश

 

पटना.  हाई कोर्ट के इतिहास में आज पहली बार दूसरे वरिष्ठ जज जस्टिस राकेश कुमार ने न्यायिक आदेश में हाईकोर्ट की अंदरूनी समस्यायें उजागर करने के साथ न्यायिक प्रशासन में भ्रष्टाचार का आईना दिखाया है. मुख्य न्यायाधीश सहित 30 जजों में दूसरे वरिष्ठतम जस्टिस राकेश कुमार ने कहा कि हाईकोर्ट प्रशासन से ही निचली अदालतों के भ्रष्ट न्यायिक अधिकारियों को संरक्षण मिलता है . जिस अधिकारी को भ्रष्टाचार के मामले में बर्खास्त होना चाहिए उस अधिकारी को मामूली सी सजा देकर छोड़ दिया जाता है.

जस्टिस राकेश कुमार नहीं कर सकेंगे सिंगल बेंच की सुनवाई

जस्टिस राकेश कुमार ने कहा कि हाई कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश और अन्य जजों ने भी मेरे द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए आवाज को दरकिनार कर दिया है .उन्होंने कहा कि जब से हमने न्यायमूर्ति पद की शपथ ली है तब से यह देख रहा हूँ कि सीनियर जज मुख्य न्यायाधीश को मस्का लगाने में मशगूल रहते हैं ताकि उनसे कोई ” फेवर ” ले सके और भ्रस्टाचारियों को भी “फेवर” दे सकें .

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जस्टिस राकेश कुमार

 

जजों के बंगले के साज-सजा पर अपव्ययद

हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के बंगला आवंटन मामले में भी बहुत सी बातों की अनदेखी की जाती है. जजों एवं मंत्रियों के आवासों के साज सज्जा में बेवजह पैसे को पानी की तरह पाया जाता है. पैसा बहाने वाले को शायद यह मालूम नहीं होता यह देश के टैक्सपेयर का पैसा है. अगर इस पैसे को देश हित या गरीबों के हित में लगाया जाए तो एक कल्याण का काम होगा. लेकिन ऐसा नहीं होता है साज सज्जा में करोड़ों रुपए खर्च कर दिए जाते हैं. बेली रोड , सर्कुलर रोड , अणे मार्ग समेत अन्य जगहों पर स्थित जजों के आवासीय बंगलों के आवंटित होने और उनके दखल करने के बीच महीनों के समय लग जाता हैं .और इस बीच उन बंगलो के रखरखाव में करोड़ों खर्च कर दिए जाते हैं।

बर्खास्त होने वाले को मामूली सजा

पटना हाई कोर्ट द्वारा कई न्यायिक अफसरों के खिलाफ गम्भीर शिकायतों की अनदेखी की गई. एक अफसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही में आरोप साबित हुआ जिसकी सजा बर्खास्तगी ही होनी थी. जबउस ऑफिसर के खिलाफ सजा के बिंदु पर हाई कोर्ट के सभी न्यायमूर्ति की फूल कोर्ट मीटिंग सजा के बिंदु पर विचार करने के लिए हुई लेकिन मेरी अनुपस्थिति में ही उसे बर्खास्तगी की जगह मामूली सजा दी गयी. मेरे आने के बाद मेरे विरोध को भी सभी जजों ने एक सिरे से खारिज कर दिया . भ्रष्टाचारी न्यायिक अफसरों को संरक्षण देना पटना हाई कोर्ट में एक परिपाटी बनती जा रही है .

भ्रष्टाचार के आरोपी आईएएस को दी जमानत

यही कारण हैं कि निचली अदालत के न्यायिक अफसर ने बिहार के वरीय आईएएस अधिकारी केपी रमैय्या जैसे अफसर को जमानत देने की धृष्टता की. जिसकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज़ करते वक़्त खुद हाईकोर्ट ने रमैय्या के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को गम्भीर माना था .उन्होंने कहा कि पटना की निचली अदालत में स्टिंग ऑपरेशन के दौरान सरेआम घूस मांगते न्यायालय में पदस्थापित कर्मचारियों को पूरे देश ने देखा . लेकिन ऐसे भ्रष्ट कर्मियों के खिलाफ आज तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है. जबकि पटना हाई कोर्ट का एक एडवोकेट पिछले डेढ़ वर्षों से एक जनहित याचिका हाई कोर्ट में दायर कर प्राथमिकी दर्ज करने की गुहार लगा रहा है .लेकिन आज तक हाई कोर्ट प्रशासन प्राथमिकी दर्ज नही कर पाया है.

स्टिंग आपरेशन मामले का स्वत:संज्ञान

जस्टिस राकेश कुमार ने उक्त स्टिंग ऑपरेशन के प्रकरण पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पूरे मामले की सीबीआई से जाँच करने का निर्देश दिया है.पटना हाई कोर्ट के इतिहास में यह पहला न्यायिक आदेश है जिसमे पूरे हाई कोर्ट के अंदरूनी समस्याये उजागर हुई है.सुप्रीम कोर्ट, पीएम और सीबीआई को भी आदेश की कापी भेजने का निर्देश जस्टिस राकेश कुमार ने हाई कोर्ट प्रशासन को निर्देश दिया कि आज के इस आदेश की कॉपी भारत के मुख्य न्यायाधीश , सुप्रीम कोर्ट की कॉलिजियम , पीएमओ , केंद्रीय कानून मंत्रालय के साथ सीबीआई निदेशक को भी भेज दिया जाय.

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