Patna: पूरा देश कोरोना महामारी से लड़ाई में एकजुट है. सरकार के साथ इस त्रासदी में जरूरतमंदों की मदद के लिए तख्त श्री हरमंदिर साहिब गुरुद्वारा भी बेहद मजबूती से खड़ा है और गरीबों के बीच राहत बांट रहा है.

कोरोना की इस त्रासदी में तख्त श्री हरमंदिर साहिब गुरुद्वारे की रौनक भले ही कुछ फ़ीकी पड़ गई है लेकिन सेवादारों के सेवा के भाव में कोई कमी नहीं आई है. गुरुद्वारे के सेवादार इस त्रासदी में बेहद मजबूती से जरूरतमंद लोगों के बीच राहत बांट रहे हैं. कोरोना जैसी त्रासदी में एक तरफ जहां लोग परेशान और डरे हुए हैं ऐसे में गरीबों और बेहद जरूरतमंद लोगों के बीच तख्त श्री हरमंदिर साहिब के सेवादार लोगों तक राहत पहुंचा रहे हैं. यही नहीं कोरोनाबन्दी के बीच रोज गुरुद्वारे के लंगर भी चल रहे हैं और हर रोज हजारों लोग लंगर का खाना भी खा रहे हैं. फर्क बस इतना है कि लंगर का स्वरूप बदल गया है और लाकडाउन -सोशल डिस्टनसिंग की वजह से गुरूद्वारे में लंगर नहीं बल्कि अब यह लंगर घर-घर तक पहुंच रहा है.

लंगर में हर रोज कभी लोगों के लिए मीठी चावल,दाल-रोटी..सब्जी, खीर तो कभी हलवा-पुरी तैयार किया जा रहा है. लंगर का काम देख रहे सेवादार दीपक सिंह और सोनू सिंह बताते हैं कि आज गरीबों में गुरुद्वारे की तरफ से हलवा-पुरी खिलाने की तैयारी है. सेवादार दीपक सिंह कहते हैं कि तख्त श्री हरमंदिर साहिब की तरफ से हर रोज 10000 खाने के पैकेट गरीबों और जरूरतमंद लोगों बांटे जा रहे हैं और यह राहत बांटने का काम पिछले 22 मार्च यानि लाकडाउन के शुरुआत से ही लगातार चल रहा है.

गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से जुड़े लोग बताते हैं कि हर रोज वो 10 हजार खाने का पैकेट गरीबों और जरूरमंद लोगों के बीच बांटते हैं. इनकी इस सेवा भाव के पीछे एक धार्मिक सोंच भी है. तख्त श्री हरमंदिर साहिब के कथावाचक ज्ञानी गगनदीप सिंह बताते हैं कि सेवाधर्म की यह भावना दरअसल उनके धर्मगुरु और सिक्खों के पहले गुरु गुरुनानक देव की प्रेरणा से ही मिली है. गगनदीप सिंह कहते हैं कि सबसे पहले लंगर की शुरुआत गुरु नानक देव जी ने उन गरीबों के घर-घर जाकर ही की थी. उन दिनों गुरुनानक देव जी ने सबसे पहले अपने 20 रुपए की जमापूंजी से ही लंगर की शुरुआत की थी. आज अपने गुरु के बताए गए रास्ते पर ही चलकर तख्त श्री हरमंदिर साहिब के सेवादार इस कोरोना त्रासदी में गरीबों और जरूरतमंदों के बीच राहत बांट रहे हैं.

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