भागलपुर, बिहार के भागलपुर में लोगो ने यमराज को चिट्ठी लिख गुहार लगाई की कृपा कर अभी इस शहर में मत आइए। यहां के लोगों को फिलहाल मौत से मुक्‍त रखिए। हमलोग मरने के बाद अपने परिवार को कष्ट नहीं देना चाहते क्योंकि हमारे पास ₹25,000 नहीं है।

मामला शहर के बरारी शमशान घाट पर शवों के साथ मची लूट का है। इसे लेकर भागलपुर के कुछ लोगों ने सीधे यमराज (Yamraj) से ही कनेक्‍शन बैठाकर उन्‍हें परिस्थिति से अवगत कराया है। साथ ही इस पत्र की कॉपी धरती पर भागलपुर के जिलाधिकारी (DM), अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) तथा नगर आयुक्‍त (City Commissioner) को भी प्रेषित की गई है।

भागलपुर के लोगों ने यमराज को लिखी यही चिट्‌ठी।

बरारी घाट पर अराजक स्थिति से परेशान लोगों को जब कोई और रास्ता नहीं सूझ तो यमराज को ही चिट्ठी लिख डाली। परेशानी की वजह यह है कि बरारी शमशान घाट पर अनिवार्य रूप से ₹ 25,000 खर्च करने पर ही शव को जलाने की अनुमति दी जाती है।

वैसे घाट पर शव जलाने के दौरान विभिन्‍न मदों में कुल 30,920 रुपये खर्च हो जाते हैं। दाह संस्कार के नाम पर मची लूट की चर्चा करते हुए पत्र में यमराज से आग्रह किया गया है कि लोगों के पास इतने रुपये नहीं हैं इसलिए वो अभी मौत का वारंट लेकर न आए।

शमशान घाट पर शव जलाने में मनमानी
मामला भागलपुर के बरारी श्मशान घाट पर शव जलाने के दौरान मनमानी का है। वहां मृतकों के परिवारों से मनमानी वसूली की जाती है और इसे नहीं देने पर दुर्व्‍यवहार भी किया जाता है। मृतक के परिवार की आर्थिक हैसियत को आंक कर हर जगह वसूली की जाती है।

यहां तक कि डोम राजा मुखाग्नि देने में भी जमकर मोलभाव करते हैं। इससे परेशान लोगों की गुहार जब धरती के अधिकारियों ने नहीं सुनी तो उन्होंने यमराज से ही मौतों पर रोक लगाने की मांग कर डाली है।

शमशान घाट पर ली जाने वाली रकम
यमराज को पत्र लिखने वाले कमल जायसवाल, आनंद कुमार सिन्हा, विनय कुमार सिन्हा, अभय कुमार घोष, जयप्रकाश जायसवाल, कन्हैया लाल एवं राजीव कुमार आर्य ने बरारी शमशान घाट पर ली जाने वाली रकम का पूरा ब्‍योरा दिया है।

लकड़ी (तीन क्विंटल) : कुल 2700 रुपये
झौवा (दो पीस) : कुल 200 रुपये
टायर (दो पीस) : कुल 20 रुपये
शुद्ध घी (दो किलो) : कुल 1000 रुपये
धुमना, चंदन की लकड़ी, फूल, बांस, कपूर : कुल 7000 रुपये
मुखाग्नि एवं पंचकाठी (डोम राजा द्वारा) : कुल 3000 रुपये
घाट पर 50 लोगों का भोजन : कुल 10000 रुपये
घाट पर चाय-पानी : कु5 2000 रुपये
(कुल खर्च: 30,920 रुपये)

और भी है कई परेशानियां
स्‍थानीय व्‍यवसायी सुरेश सिंह कहते हैं कि शमशान घाट की सुविधाओं पर किसी का ध्‍यान नहीं है। न तो जलती चिता को हवा से रोकने का इंतजाम है, न ही यहां लाइट, पेयजल आदि की व्‍यवस्‍था है। विद्युत शवदाह गृह का संचालन भी अप्रशिक्षित लोगों के हवाले है। नाम नहीं देने के आग्रह के साथ एक शवदाह गृह कर्मी ने ही राज खोला कि यहां 16 अगस्त 2020 से कार्यरत आठ कर्मियों को नगर निगम पारिश्रमिक नहीं दे रहा है।

यमराज को लिखे गए इस पत्र के लोग खूब मजा ले रहे हैं, लेकिन इसमें लिखी गई बातों से इत्‍तफाक भी रखते हैं।

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